जब जब देखूं मैं आयना,
नज़र कही मै आई ना।
दर्पण में है कोई जादू ,
राज की बात मै कैसे जानू।
मेरे दिल में तुम ही बसे हो,
निशदिन नजर में तुम रहते हो।
कैसी है यह मृगतृष्णा,
तुम ही बता ओ कृष्णा।
लोग कहे में हुई बावरिया,
प्रेम में तुम्हारे ओ सांवरिया।
बैठे-बैठे मैं हंसती हूं,
आप में ही बातें करती हूं।
प्रेम लग्न ऐसी लागी है ,
Heartly Touching
ReplyDeleteHeartly Touch
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