रचना ____ गजेंद्र मोक्ष करता।
हे कृष्ण श्री राधे रानी।।
हे पावन जग के रचनाकार।
उन दुष्टों का तुम करो संघार।।
हे विष्णु चक्र सुदर्शन धारी।
करो नास हर अत्याचारी।।
हे नृप श्रेष्ठ जग के स्वामी।
नाश करो हर अहंकारी।।
हे कुलभूषण करते शस्त्र अलंकार।
हे शास्त्रोंक्त ज्ञाता निराकार।।
हे कुलश्रेष्ठ कृपा धारी।
हे मधुसूदन सुदर्शन धारी।।
हे विलक्षण शक्तियों के ज्ञाता।
हे मंगल करता विश्व विधाता।
मणियों को छड़ में रज करता।
हे रज क्षण मणियों में करता।
हे गजेंद्र मोक्ष करता।
हे प्राणी मात्र निवास करता।
है नमन तुम्हें हर कण करता।
है नमन तुम्हें हर मन करता।
है मन जो तुम्हें नमन करता।
उस मन में जो दन्ष करता।
बन जाओ उसके प्राण हरता।
यह सृष्टि तुम्हारे चरणों में।
है शपथ तुम्हें उन भक्तों का।
कब प्रयोग करोगे शस्त्रों का।
अज्ञानी उस मूर्ख का।
कब नाश करोगे घुढ़त का।
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