कृष्ण के बहते टप टप असु,
रोते सुबह शाम।
जानें तो बस वो ही जाने,
छिपाए रहे श्याम।।
मथुरा जा कर कैसे भूले ,
बचपन की हर बात ।
मैया बाबा वहीं रह गए,
रह गए ग्वाल बाल।
मुरली की धुन वहीं रह गई,
रह गई गाओए सारी।
माखन मिश्री वहीं रह गए
सासो के साथ सिसकियां
निकले, बहते असुआं धार।
मथुरा में किशना रोते,
नन्दगाव, में ग्वाल बाल।।
मेरी आंखो से बहती गंगाकी धार
पावन चरणों में मेरा श्री धाम।
निर्मल मन मैं करती सबको याद,
जीवन समर्पित कर दिया अब नहीं रहा कुछ याद।
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