रचनाकार का नाम नाम ____निशि द्विवेदी
बोल,___अब रहना है आसमानों में,
बहुत देख ली जमीन,
अब उड़ना है आसमानों में,
निभाया हर रिश्ता बखूबी,
अब रहना है आसमानों में, साइकिल सहारा नहीं,
आत्मनिर्भर होकर जाना है आसमानों में,
मार्ग जमी पर नहीं,
अब बनाना है आसमानों में,
हो हौसले बुलंद तो अवश्य,
मार्ग मिलता है आसमानों में ,
मार्ग प्रशस्त है मेरा,
अब चलना है आसमानों में,
हौसले बुलंद हैं हमारे ,
अब तो बसना है आसमानों में,
पांव थक चुके धरती पर ,
अब पंखों से उड़ जाना है आसमानों में,
पंख झड़ रहे तो क्या ,
कल्पना के पंख काम आते हैं आसमानों में,
अब जमीन की चाह नहीं,
अब तो मिलना है आसमानों में,
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