Wednesday, 27 January 2021
तेरे चरणों की मैं हूं दासी, तुम बिन रहा उदासी
फेरा है चौरासी लाख योनियों का , फिर भी.....
Tuesday, 29 December 2020
निशी कृष्ण नैनों में रहना और कहीं तुम ना जाना
Saturday, 26 December 2020
निगाहों में तुम हो
Wednesday, 2 December 2020
तुमको ना भूल पाएंगे
Monday, 2 November 2020
मैं चंदा देखन जाऊं ,या नयन सुख पाओ।।
Sunday, 1 November 2020
तेरे चरणों की मैं हूं दासी, तुम बिन रहा उदासी
मुझसे ब्याह रचा लै,
मुख से निकले शब्द, तौल के बोलो।
Tuesday, 27 October 2020
मुझको लगती है बस तेरी बातें प्यारी,
Friday, 16 October 2020
हास्य कलाकार पिंकू दि्वेदी
Sunday, 11 October 2020
बस तुम साथ होते।
Friday, 9 October 2020
पैसे से ही रिश्ता कैसा?
Monday, 5 October 2020
शरारत खो गई है कहीं चलो मिलकर ढूंढो,
Sunday, 27 September 2020
नफरत छोड़ शांति को बड़ा डालो
Friday, 18 September 2020
कभी न जागूं ऐसी नींद सुला दे,
Wednesday, 16 September 2020
तुम बिन रहा न जाए,
Tuesday, 15 September 2020
राधे के चरणों में ही हम जिएंगे।
तुम को ही चाहता है दिल,
Sunday, 13 September 2020
नहीं दूर का रिश्ता,
Friday, 11 September 2020
नारी हूं मैं ,मेरा भी तो, आजादी का दिल करता है।
Tuesday, 8 September 2020
एक मेरी मोहब्बत को ना समझे।
Saturday, 5 September 2020
होने न दोगे आंखों से ओझल प्रिय
संतो के समागम से उत्थान संस्कृत का
Tuesday, 1 September 2020
आज मैं बजाऊंगी बंसी तुम्हारी,
कान्हा तेरे प्यार में
Monday, 31 August 2020
नीतिपरक और सच्ची बातें बच्चों को बताई रखिए।
Sunday, 30 August 2020
दर्पण कहे श्रंगार कर आंखें काली रखें,
Friday, 28 August 2020
तुमको ना भूल पाएंगे,
Thursday, 27 August 2020
रिया को मत होने देना रिहा।।
मेरी यह कविता सुशांत सिंह राजपूत को न्याय दिलाने की एक कोशिश है।
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मेरा रूठ गया है सपना ।
मेरा रूठ गया कोई अपना।
रेत की तरह कोई मुट्ठी से फिसल गया है।
मेरा अपना कोई मुझे तन्हा कर गया है।
दिल के आशियाने में बिठाया था मैंने।
वही मुझे कुचलकर निकल गया है।
तिनको को चुन चुन कर महल बनाया था।
दिल के फ्रेम में उसका फोटो भी लगाया था।।
लहर की तरह आया, और बिखरा कर चल दिया।
आज मेरा दिल❤️ तिनको में बिखरा पड़ा है।
वादा किया था मैंने ,कि सफर के साथी बनेंगे।
चंद सिक्कों के लिए मुझे छोड़ कर चल दिए।।
कैसे बताऊं मैं ,कैसे तुम्हें जताऊं।
हाथ पैर दीवारों पर पटक रहा हूं।।
चीख चीख कर पुकारू मैं नाम तुम्हारा।
दिल में लिखे नाम को आंसुओं से धो रहा हूं।।
मैं कैसे इसे समझाऊं मैं कैसे तुझे भुलाऊं।
जितना भुलाना चाहा, तू उतना रुलाती है।।
किस्मत वालों के हाथ में होती है वह लकीरे।
मेरे दिल में चुभती है तेरे नाम की लकीर ।।
तन्हा अकेला कर दिया जिंदगी की राहों में।
आज बैठकर समुंदर के किनारे रो रहा हूं।।
चंद सिक्कों के लिए तूने मेरा प्यार ठुकराया
क्या वह सिक्के वह प्यार दे पाएंगे जो मैंने दिया।।
तेरी मासूमियत देख मैंने दुनिया छोड़ी।
तुझे मेरी मोहब्बत रास नहीं आई।।
कहते हैं मोहब्बत एक तरफा नहीं होती।
मैंने दिल से चाहा था , मुझे सजा मिली।।
सुशांत को मिटाया तू भी अशांत रहेगी।
रिया नाम था तेरा तू भी रिहा नहीं होगी।।
स्वरचित रचनाकार का नाम ____निशि दिवेदी
कोई लौटा दे मेरा बचपन।
Thursday, 20 August 2020
नारी का सम्मान करो।
Sunday, 16 August 2020
कटु परंतु सत्य
Tuesday, 11 August 2020
प्रकृति का राज ना जाने पावे , चाहे जितना विज्ञान पढ़ आवै,
Saturday, 1 August 2020
नहीं भाता कोई चेहरा,
हाथ लगाकर मेहंदी इंतजार तुम्हारा है,
Friday, 31 July 2020
ओ री सखी मैं भी तेरे जैसी होली,
बहू बेटी में फर्क
खोने का डर
जितनी शिद्दत तुम्हें पाने की थी उससे ज्यादा डर तुम्हें खोने का है बस यही है कि तुमसे लड़ती नहीं तुम यह ना समझना कि...
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नाम____निशि द्विवेदी बोल___झूला रहे झूला राधा को कन्हैया। झूल रहे झूला राधा के कन्हैया, झूल रहे झूला राधा के कन्हैया, ...
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पैसा पैसा पैसा***** हाय पैसा पैसा****** पैसे के लिए ही """" ईमान धर्म है बिकता .... पैसे से है यारी..........
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नाम_____निशि द्विवेदी कविता के बोल___तपती दोपहरी में सर्द हवा से तुम। तपती दुपहरी में श्याम सर्द हवा से तुम लगते हो। प्यासी धरती...